Wednesday, 21 August 2019
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  • वेतन में कोई नई बढ़ोतरी नहीं हुई

  • सितम्बर 2018 में बढ़ोतरी की घोषणा की गई लेकिन इसे लागू करने के लिए आवश्यक राशि का आधा भी आवंटन नहीं किया।

  • आंगनवाड़ी वर्कर्स व हैल्पर्स 25 फरवरी 2019 को दिल्ली में विरोध प्रदर्शन करेंगें

अंतरिम बजट 2019 - 20 में, भाजपा सरकार ने 26 लाख आंगनवाड़ी कर्मचारियों के साथ फिर से धोखा किया। बजट में न केवल आंगनवाड़ी वर्कर्स व हैल्पर्स की लंबित मांगों को नज़रअंदाज़ किया गया बल्कि देश में कुपोषण के सवाल को भी नजरअंदाज़ किया।

11 सितम्बर 2018 को प्रधानमंत्री ने आंगनवाड़ी वर्कर्स, मिनी आंगनवाड़ी वर्कर्स व हैल्पर्स के वेतन में बढ़ोतरी की घोषणा की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि यह बढ़ोतरी 1 अक्टूबर 2018 से लागू होगी और कर्मचारियों को दीपावली से पहले बढ़ा हुआ वेतन मिल जाएगा। लेकिन आज तक अधिकतर राज्यों में अभी तक बढ़ा हुआ वेतन नहीं मिला। सितम्बर में प्रधानमंत्री द्वारा की गई वेतन बढ़ोतरी अंतरिम बजट भाषण में वित मंत्री ने इस तरह प्रसतुत किया कि ऐसा लगे कि आंगनवाड़ी कर्मचारियों के वेतन में और बढ़ोतरी की गई है।

बजट के आंकड़े दर्शाते हैं कि बजट में आईसीडीएस के लिए जो आवंटन किया गया है वो सितम्बर 2018 में की गई वेतन बढ़ोतरी लागू करने के लिए भी पर्याप्त नहीं है। 11 सितम्बर 2018 की सरकार की प्रैस विज्ञप्ति में कहा गया है कि 1.10.2018 से 31.3.2020 तक ( 18 महीने ) बढ़ा हुआ वेतन देने के लिए 10,649.41 करोड़ रू अतिरिक्त बजट आवंटन की आवश्यकता होगी। एक साल की वेतन बढ़ोतरी के लिए 60 फीसद हिस्सा 4259 करोड़ रू की ज़रूरत थी। लेकिन ‘‘आंगनवाड़ी सेवाओं’’ के लिए बजट में अम्ब्रैला आईसीडीएस के लिए वर्ष 2019 - 20 के लिए केवल 19834.37 करोड़ रू ही आवंटित किए गए हैं। पिछले साल रिवाईज़ किए गए बजट में 17870.19 करोड़ रू दिए गए थे, इस बार बजट में केवल 1944.18 करोड़ रू की बढ़ोतरी की गई है। वेतन बढ़ोतरी को लागू करने के जितनी राशि की ज़रूरत है, यह राशि उसकी आधी भी नहीं है। 
इस बजट में आंगनवाड़ी कर्मचारियों के लिए पेंशन का ज़िक्र भी नहीं किया गया है जिसका सरकार ने 2014 में वादा भी किया था। व्यंग्य यह है कि भारत सरकार ने सितम्बर 2017 में ( पीआईबी प्रैस विज्ञप्ति दिनांकित 20 सितम्बर 2017के माध्यम से ) बयान दिया कि आंगनवाड़ी केंद्रों में पूरक पोषाहार के लिए 12000 करोड़ रू अधिक खर्च किए जाऐंगे। इसका मतलब है कि पोषाहार के लिए प्रति वर्ष 6000करोड़ रू अतिरिक्त व्यय। यह स्पष्ट है कि मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने इस चुनावी बजट में आंगनवाड़ी वर्कर्स व हैल्पर्स के साथ - साथ देश की जनता को भी गुमराह करते हुए देशभर की 2 करोड़ माताओं व 6 साल से कम उम्र के 10 करोड़ बच्चों को नज़रअंदाज़ किया है। असंगठित क्षेत्र की कामकाजी महिलाओं को बाल देखभाल की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों को पूर्णकालिक क्रैच में बदलने के लिए कोई आवंटन या जिक्र भी नहीं किया गया। इसके बजाए सरकार ने पोषाहार के बदले पैसा देने का निर्णय लिया है और दो पायलट प्रोजैक्टों में लागू भी कर दिया है।

आईसीडीएस के लिए पर्याप्त आवंटन न करने, पोषाहार के बदले पैसा देने के खिलाफ तथा योजना श्रमिकों के लिए 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों जिनमें न्यूनतम वेतन व पेंशन शामिल है को लागू करवाने के लिए आइफा 25 फरवरी 2019 को नई दिल्ली में व्यापक पैमाने पर लामबंदी करेगी। आइफा अपनी सभी राज्य यूनियनों तथा देशभर के आंगनवाड़ी वर्कर्स व हैल्पर्स का आह्वान करती है कि भाजपा सरकार की इन मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ 25 फरवरी 2019 को दिल्ली में बड़ी संख्या में शामिल हों। हम देश के मजदूर वर्ग से अनुरोध करते हैं कि आईसीडीएस को बचाने के हमारे संघर्ष में पूरा समर्थन दें। 
जारीकर्ता

ए आर सिंधु,
महासचिव