महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 4 मार्च 2021 को राज्य सरकारों को एक आदेश जारी किया है जिसमें मंत्रालय द्वारा सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों द्वारा 15 मार्च 2021 तक पोषण ट्रैकर मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के काम को पूरा करने के लिए कहा गया है। इस आदेश में आगे कहा गया है “कृप्या ध्यान दें कि मार्च 2021 के बाद आंगनवाड़ी वर्कर्स के मानदेय का भुगतान सभी राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों में पोषण ट्रैकर ऐप डाउनलोड करने और डेटा के त्वरित इनपुट से जोड़ा जाएगा। 2021 की पहली तिमाही के बाद से राज्यों /केंद्र शासित प्रदेशों को खाद्यान्न / धनराशि का आवंटन भी पोषण ट्रैकर प्रणाली पर लाभार्थियों के उपलब्ध डेटा पर आधारित होगा। ‘(दिनांक 4 मार्च 2021 को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, पोषण अभियान द्वारा जारी पत्र क्रमांक थ्ण्छवण्च्।ध्41ध्2021.ब्च्डन् ;म.91729द्ध )। ऐप को डाउनलोड करने के लिए, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता (जिसे प्रतिमाह 4500/- रू मानदेय दिया जाता है) के पास एंड्रॉइड 6 या उससे ऊपर का मोबाइल फोन होना चाहिए।

जिस सरकार ने कुछ महीने पहले मोबाइल एप्लिकेशन विकसित किया था, उसने राज्यों और सभी आंगनवाड़ी वर्कर्स और हैल्पर्स को दस दिनों के भीतर इसे डाउनलोड करने का निर्देश दिया है और वर्कर्स को मोबाइल फोन के वितरण को सुनिश्चित किए बिना, उनके वेतन का भुगतान न करने की धमकी दी है। अधिकांश राज्यों में मोबाइल फोन का वितरण अभी तक पूरा नहीं हुआ है। कुछ राज्यों में यह बताया गया है कि मोबाइल फोन आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को कुछ साल पहले वितरित किए गए थे और इन फोनों में एंड्रॉइड सिस्टम के पुराने संस्करण हैं जो ‘पोषण ट्रैकर ऐप’ के साथ असंगत हैं। कई डीपीओ/ सीडीपीओ कार्यालयों का अभी भी डिजीटलीकरण किया जाना बाकी है।

हालाँकि आंगनवाड़ी वर्कर्स को ऑनलाइन डेटा अपलोड करने के लिए कहा जाता है, लेकिन अधिकांश राज्य आँगनवाड़ी वर्कर्स को डेटा के लिए भत्ता (200 रू प्रति माह) नहीं दे रहे हैं। इसके अलावा, हमारे देश के कई हिस्सों में, मोबाइल में इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध नहीं है या बहुत खराब है और मोबाइल फोन से डेटा अपलोड करना लगभग असंभव है। हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में, आंगनवाड़ी वर्कर्स को डेटा अपलोड करने के लिए इंटरनेट कनेक्टिविटी प्राप्त करने के लिए कई किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है।

मंत्रालय द्वारा आंगनवाड़ी वर्कर्स के भुगतान को पोषण ट्रैकर ऐप डाउनलोड करने के साथ जोड़ने और मार्च 2021 से आंगनवाड़ी वर्कर्स के वेतन को रोकने का निर्णय अवैध और अनैतिक है। इसके अलावा, 2021 की पहली तिमाही से धन और खाद्यान्न के आबंटन को वापस लेने का निर्णय, कुपोषित बच्चों को उनकी गलती के बिना भोजन के अधिकार से वंचित करेगा।

लॉकडाउन के बाद से, आंगनवाड़ी केंद्र अभी तक पूरी तरह से चालू नहीं हुए हैं। आंगनवाड़ी वर्कर्स अपनी जान जोखिम में डालकर कोविड -19 महामारी से लड़ रहे हैं। मोबाइल फोन की अनुपलब्धता और डेटा के लिए भुगतान न होने में आंगनवाड़ी वर्कर्स या लाभार्थियों की कोई गलती नहीं है। नई तकनीकों का उपयोग, काम के बोझ को कम करने और दक्षता में सुधार के बजाय, इसका उपयोग जमीनी स्तर के वर्कर्स और लाभार्थियों को दंडित करने के लिए करना, जनहित के खिलाफ है। ये घोषणाएं इसी सरकार ने की हैं, जिसने कोविड महामारी और तालाबंदी के दौरान कुपोषण में बढ़ोतरी और निरपेक्ष गरीबी के बावजूद आईसीडीएस के लिए बजट आवंटन में 30 प्रतिशत की कटौती की है।

आइफा मांग करती है कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को आंगनवाड़ी वर्कर्स के वेतन (मानदेय) और आईसीडीएस के खाद्यान्न / फंड के आवंटन को ‘पोषण ट्रैकर ऐप’ के कामकाज से जोड़ने के आदेश को तुरंत वापस लेना चाहिए।

हम यह भी मांग करती हैं कि सरकार को वेब आधारित रिपोर्टिंग सिस्टम में पूरी तरह से स्थानांतरित करने से पहले आईसीडीएस के लिए पर्याप्त वित्तीय आवंटन सुनिश्चित करना चाहिए ताकि आईसीडीएस की मूलभूत संरचना, गुणवत्तापूर्ण पोषाहार, ठीक से प्रशिक्षण में सुधार के साथ साथ मोबाइल फोन, मोबाइल डेटा, प्रशिक्षण, नेटवर्क की उपलब्धता आदि में भी सुधार लाया जा सके।

आइफा, सरकार को चेतावनी देती है कि सरकार अपने दोषों के लिए निर्दोष जनता को दंडित करने के ऐसे नृशंस कदमों के साथ आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों को सड़कों पर ले आएगी। यदि वर्कर्स का वेतन रूका या आईसीडीएस के फंड पर रोक लगी तो आइफा लाभार्थियों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर संघर्ष करेगी।

जारीकर्ता

ए आर सिंधु
महासचिव

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