आइफा कार्यसमिति द्वारा 26 मई 2017 को ‘‘धोखा दिवस’’ के रूप में मनाना तय किया गया है। इस दिन नरेंद्र मोदी सरकार को सत्ता में आए तीन वर्ष हो गए हैं।

भाजपा के नेतृत्व में एनडीए सरकार, काफी लंबे समय के अंतराल के बाद किसी एक दल को बहुमत मिलने से सत्ता में आई। भाजपा सरकार ने ‘अच्छे दिनों’’ के वादे का मीडिया में बहुत प्रचार किया, जिसके कारण इसे बहुमत मिला। कांग्रेस की यूपीए सरकार की नीतियों से तंग आ चुकी जनता, इन नीतियों से परेशान होकर आत्महत्या करने को मजबूर लाखों किसान, नौकरी खोने वाले मजदूर, खेतिहर मजदूर आदि ने इन नीतियों से छुटकारा पाने के लिए कांग्रेस सरकार को हराया।

यूपीए शासन में आंगनवाड़ी वर्कर्स व हैल्पर्स, मजदूर मानने, न्यूनतम वेतन या पेंशन देने से इंकार कर दिया गया था। इसके अलावा यूपीए सरकार ‘‘आईसीडीएस’’ को मिशन मोड में ले आई, जिसका लक्ष्य है - योजना का पूरी तरह से निजीकरण करना। यूपीए सरकार के खिलाफ गुस्सा और ‘अच्छे दिनो’ के वायदे तथा मीडिया के प्रचार के कारण, मई 2014 के चुनावों में मोदी सरकार सत्ता में आई।

लेकिन मोदी की अगुआई वाली एनडीए सरकार के तीन साल यूपीए से भी बदतर साबित हुए हैं। भाजपा सरकार ने उन्हीं नीतियों को और भी तेजी से लागू किया है। किसानों की आत्महत्या, प्रवासन, बेरोजगारी, महंगाई, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अत्याचार, श्रम कानूनों का उल्लंघन .. सभी जारी हैं। यूपीए सरकार की नीतियों को जारी रखते हुए मोदी सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां और राष्ट्रीय संपत्तियां बनाने वाली कंपनियों को बेच रही है, कॉरपोरेट कंपनियों के कर में छूट को बढ़ा रही है, मजदूरों द्वारा कड़ी मेहनत से प्राप्त श्रम कानूनों को नियोक्ताओं के पक्ष में बदल रही है।

यह 45 वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों का जोरदार रूप से विरोध कर रही है जिसमें ‘आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं सहित योजना श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी का भुगतान और सामाजिक सुरक्षा और पेंशन प्रदान करने’’ की सिफारिशें की गई थीं।

नरेंद्र मोदी भारत के पहले और एकमात्र प्रधान मंत्री हैं, जिन्होंने आईसीडीएस का बजट 2015-16 में अपने पहले पूर्ण बजट में आधा कर दिया। 2014-15 में 18108 करोड़ रुपये (बजट अनुमान) से मात्र 8245.77 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया। बाद में हमारे संघर्षों ने सरकार को अनुपूरक अनुदान के माध्यम से बजट में वृद्धि करने के लिए मजबूर किया। लेकिन 2016-17 और 2017-18 में भी बजट आवंटन, आईसीडीएस के लिए योजना आयोग के आबंटन के प्रस्ताव का आधा हिस्सा मात्र है।

2014 लोकसभा चुनावों के लिए घोषणा पत्र के पृष्ठ 21 पर, भाजपा ने वादा किया है कि ‘आंगनवाड़ी कामगारों की कार्यपरिथितियों की समीक्षा की जाएगी और उनकी पगार बढ़ाई जाएगी।’

लेकिन, महिला एवं बाल विकास मंत्री ने संसद में स्पष्ट रूप से कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के वेतन में वृद्धि संभव नहीं है।

बजट कटौती के चलते, संसाधन संकट के कारण कई राज्यों में आईसीडीएस संकट में है। कई राज्यों में आईसीडीएस में बड़े पैमाने पर निजीकरण चल रहा है।

इस पृष्ठभूमि में हमने मोदी सरकार की तीसरी वर्षगांठ को ‘धोखा दिवस’’ के रूप में मनाने का फैसला किया है।

हम देश के सभी आंगनवाड़ी कर्मचारियों का आह्वान करते हैं कि इस दिन परियोजना स्तर पर, मोदी सरकार के झूठे वादों को जलाने के प्रतीक के रूप में, भाजपा का चुनावी घोषणापत्र जलाएं।


जारीकर्ता

ए आर सिंधु
महासचिव

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